अगले दिन सुबह सुबह बच्चे घर में शोर कर रहे थे। वहीं अद्विका और शौर्य किचेन में खाना पका रहे थे। आज उन दोनों ने बच्चों को मांस खाने की परमिशन दी थी। ऊपर से आज रविवार था तो बच्चों को स्कूल भी नहीं जाना था तो वो लोग खुशी से चिल्ला रहे थे।
शौर्य ने एक पोर्टल खोला और उन्हें आगम लोक गृह पर सीधा भेज दिया। फिर अद्विका को देखकर बोला, "अब कुछ हफ्तों तक बच्चों को वही रहने दो ताकि वो लोग अपना शिकार भी करेंगे और कुछ अनुभव भी प्राप्त कर पाएंगे। इससे हम यहां अपने मैन काम पर फोकस कर पाएंगे।"
ये सुनकर अद्विका भी मुस्कुराते हुए बोली, 'हां ये भी ठीक है। लेकिन हमें उस लुकास फार्मा के मालिक को जल्द से जल्द खत्म करना पड़ेगा क्योंकि हॉस्पिटल्स के रिकॉर्ड के अनुसार वो कल भी एक और एक्सपेरिमेंट करने जा रहे है। हमें उन्हें किसी भी हाल में रोकना पड़ेगा।"
ये सुनकर शौर्य बोला, "तुम एक काम करो, इन सभी एक्सपेरिमेंट में जो डॉक्टर्स और बाकी लोग है उन्हें तुम जाकर खत्म कर दो मैं उस मिनिस्टर के बच्चे को संभालता हूँ।"
ये सुनकर अद्धिका ने तुरंत हामी भरी और वो अपनी तैयारियों में लग गई। तभी शौर्य के मोबाइल पर एक नोटिफिकेशन आया। जिसे देख उसकी आंखे चमक गई और वो अद्धिका को देखते हुए बोला, 'लो अब हमारे भाईसाहब ने जिम्मेदारी ली है उस बच्चे को बचाने की। अब वो उसे बचाएगा या खुद मेरे पास लेकर आएगा ये मैं नहीं बता सकता।"
ये सुनकर अद्विका हँसने लगी। वहीं दूसरी तरफ अपने पिता के अंतिम संस्कार के बाद मिनिस्टर का बेटा नंदन सालार अपनी कुर्सी पर बैठकर अपने अगले एक्सपेरिमेंट के तैयारी में लग चुका था। उसने कुछ दूसरे शहर के गैंगस्टर को भी यहां बुला लिया था। उसे अब अपने सिक्योरिटी की चिंता थी।
खाने का समय होनपार उसने मोबाइल निकाला और पास ही के होटल से खाना ऑर्डर किया और उसका इंतजार करते हुए अपने टेबल के सामने बैठ गया। इस वक्त पूरा लुकास फार्मा खाली था क्योंकि उसका एक भी कर्मचारी काम पर नहीं आया था।
नंदन के केबिन के बाहर उसके पर्सनल बॉडीगार्डस और कुछ पुलिसवाले पहरा दे रहे थे और हर एक के हाथ में बड़ी बड़ी मशीन गन थी।
वहीं कुछ दूरी पर हाथ में वायरलेस लेकर विराज ऑफिस के हर कोने का जायजा भी ले रहा था। वो ऊपर से इच बीच में अपनी साधना शक्ति का उपयोग करके उस एरिया को स्कैन भी कर रहा था।
इधर अद्विका भी उस हॉस्पिटल पहुंच गई थी जहां एक समय वह काम करती थी। अद्विका को देखकर पूरे स्टाफ ने अपना मुंह बनाया पर अद्धिका ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया। कल उनका मालिक भी मारा गया था जिस वजह से अजित का बेटा आज ऑफिस में बैठकर एक्सपेरिमेंट करनेवाली डॉक्टर्स की टीम को तैयार कर रहा था। उसने पिछले एक हफ्ते में जितने छोटे बच्चे एडमिट हुए थे उनके रिकॉर्ड्स मंगाए थे।
हॉस्पिटल का चाइल्ड केयर यूनिट बहुत बड़ा था जिस वजह से यहां शहर के सभी लोग अपने बच्चों को छोटी छोटी बातों पर ट्रीटमेंट के लिए लेकर आते थे। इसी दौरान हॉस्पिटल के बच्चों के डॉक्टर्स उन्हें किसी ना किसी गंभीर बीमारी होने का बहाना बनाकर एक्सपेरिमेंट के कुछ दिनों पहले एडमिट करवा लेते थे।
अजीत का बेटा जितेश खुद एक शहर का जाना माना पीडियाट्रिशन था। पर वह सिर्फ एक्सपेरिमेंट के वक्त ही यहां आता था। आज भी वह अगले एक्सपेरिमेंट के लिए डॉक्टर्स से बात कर रहा था।
तभी उसकी असिस्टेंट अंदर अति है और उसे अद्धिका के आने की खबर दे देती है। ये सुनकर उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आती है। क्योंकि उसे अच्छे से पता था कि उसके भाई और पिता के मौत के पीछे इसी लड़की का हाथ था। ऊपर से ये भी पता था कि अद्धिका ने चाइल्ड केयर यूनिट के सारे रिकॉर्ड छान मारकर एक्सपेरिमेंट की जानकारी हासिल की है। अब अगर शिकार खुद यहां चलकर आया है तो वो उसे कैसे जाने दे सकता है।
उसने तुरंत अपनी असिस्टेंट से कहा, 'हॉस्पिटल के गाईंस से कहकर उसे बंदी बना लो और एक्सपेरिमेंट की जगह पर ले जाओ।"
ये सुनकर असिस्टेंट ने उसके कहे मुताबिक तुरंत गार्ड्स को मैसेज भेज दिया। इधर मैसेज मिलते ही सारे गाईस ने आकर अद्धिका को घेर लिया साथ ही कुछ गुंडे और हट्टे कट्टे लोग भी यहां पहुंच गए। हॉस्पिटल के पूरे स्टाफ के सामने उसे पकड़कर वहां से घसीटते हुए लेकर चले गए। पूरा स्टाफ पहले ही अद्विका से नफरत करता था ऊपर से शौर्य ने उन सभी को धमकी दे दी थी। जिस वजह से जब अद्विका उनसे मदद की भीख मांग रही थी तो कोई भी आगे नहीं आया।
अद्विका को एक्सपेरिमेंट चैंबर में लाकर दीवार से उसे बांध दिया और वो गाईस बाहर चले गए। वहीं उस चैंबर में कुछ छोटे बच्चे उसे देख रहे थे। वो सारे बच्चे एक साल से कम उम्र के लग रहे थे। सभी के आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था। ट ही अद्धिका ने अपनी एक्टिंग बंद की और उसने उन बच्चों को देखा और बोली, "घबराओ मत, में सभी को यहां से बाहर ले जाऊंगी।"
ये सुनकर बच्चे और भी ज्यादा डर गए क्योंकि कुछ बच्चों को तो ये भी मालूम नहीं था कि उन्हें यहां लाया किस लिए है।
वहीं जितेश सेठी ने आज की ट्रायल की दवाइयों को हाथ में ले लिया और अपने स्टाफ के साथ एक्सपेरिमेंट चैंबर की तरफ निकल गया।
जब जितेश एक्सपेरिमेंट चैंबर में पहुंचा तो उसने देखा कि अद्विका को दीवार से बांध दिया गया था। और उसके खूबसूरत चेहरे पर गुस्सा, दर्द, बेबसी के भाव थे। जितेश चलकर अद्विका के सामने आया और उसने उसके गालों को जखड़कर कहा, 'बहुत शौक है ना तुम्हे इंवेस्टिगेशन करने का? में आज तुम्हारी वो हालत करूंगा कि तुम इसके बाद कभी किसी के काम में टांग नहीं अड़ाओगी।"
इतना कहकर उसने अद्धिका से आगे कुछ नहीं कहा और उसके चेहरे को डाटककर पीछे हटते हुए टीम को बोला, 'इन बच्चों को बांध दो और दवाई का ट्रायल शुरू करो। हमारे पास बेहतमुत कम समय बचा है। एकबार हम इसमें सक्सेसफुल हो जाएंगे तो हम गीतांजलि फार्मा से भी आगे निकल जाएंगे।"
लेकिन उसकी टीम बच्चों की तरफ आगे बढ़ती तभी अचानक एक डॉक्टर दर्द के मारे जोर से चीख पड़ा। उसके पेट का आगे का हिस्सा फैट चुका था औरउसकी आतडिया बाहर निकलकर गिर गई थी। जब सभी का ध्यान उस डॉक्टर की तरफ गया तो उन्होंने देखा कि एक बेहद खूबसूरत और लाल ड्रेस पहनी लड़की उस डॉक्टर के खून को हाथों से चाट रही थी।
'स्वामी सही कहते है, इन पापियों के खून का स्वाद ही कुछ अलग होता है।"
अगले ही पल उस लड़की ने डॉक्टर की गर्दन को उसके कंधे से उखाड़ लिया और दूर फेक दिया। ये रक्त सम्राज्ञी थी। उसे वहां अचानक देखकर जितेश की सिट्टी पीटी गुल हो चुकी थी। क्योंकि इस चैंबर के अंदर आने के लिए बायोमेट्रिक सिक्योरिटी सिस्टम से गुजरना होता है पर ये लड़की उनके सामने उनके बीच अचानक प्रकट हो चुकी थी।
इधर अद्धिका ने भी एक झटका दिया और अपने हाथ की रस्सियों को खोल दिया। फिर उसने उन बच्चों को देखा जो वही डरकर खड़े थे। अद्धिका ने अपना हाथ घुमाया और अगले ही पल सारे बच्च्चे बेहोश हो गए। जब सारे बच्चे बेहोश हो गए तो अद्विका बोली, 'हां तो अब हम मुद्दे की बात करते है। तो तुम सभी लोग इस एक्सपेरिमेंट में शामिल हो। तुम लोगों को बिल से बाहर लाने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी। अगर मेरी जगह मेरे पति होते तो वो अब तक तुम लोगों को कभी के खत्म कर चुके होते। चलो को बात नहीं आखिर तुम लोग मेरे सामने आ ही गए।"
इतना कहते हुए अद्धिका ने अपने दोनों हाथों की उंगलियों चटकार्ड और फिर गुस्से से उसने सामने खड़े जितेश को गले से पकड़ लिया। अगले ही पल उसने जितेश के हाथ में रखी सभी दवाइयों के इंजेक्शन को अपनी शक्ति से नियंत्रित करके जितेश के शरीर में लगा दिया।
इधर रक्त सम्राज्ञी ने भी बाकी बचे डॉक्टर्स को पकड़पकड़कर चिर फाड़कर रख दिया था। पूरा का पूरा एक्सपेरिमेंट चैंबर खून से भर चुका था। इधर जितेश ओवरडोज होने के कारण उसके शरीर की नसे फूल रही थी। साथ ही उसके सिर पर भारी दबाव बनने लगा था। वो एक झटके के साथ जोरदार दहाड़ मारकर चीख पड़ा।
तभी अद्विका ने उसकी आवाज बंद करने के इरादे से उसके सिर को धड़ से अलग कर दिया। पर अगले ही पल जितेश का शरीर फिर एकबार नॉर्मल हो गया और उसका कटा हुआ सिर वापस जुड़ गया।
ये देखकर अद्धिका हैरान होकर पीछे हट गई। तभी जितेश एक शैतानी मुस्कुराहट के साथ बोला, 'आखिर हम सक्सेसफुल हो गए। हा हा हा हा अब मै अमर बन गया, नाऊ आय एम इमोर्टल, मुझे कोई नहीं मार सकता।"
पर तभी रक्त सम्राज्ञी ने पीछे से उसके सीने में अपना हाथ डाल दिया और बोली, 'घंटे का इमोर्टल, पगले ये दवाई सिर्फ एकबार काम करेगी दूसरी बार नहीं।'
अगले ही पल जितेश का दिल उसकी पसलियों को फाड़कर बाहर निकल गया और उसकी आंखे बंद हो गई।
रक्त सम्राज्ञी ने तुरंत उसके दिल को अपने हाथों से दबाकर नष्ट कर दिया। जितेश अपनी अमर होने की खुशी को ज्यादा देर तक मना भी नहीं पाया।
जब उसका सिर काटा गया था उस वक्त रक्त सम्राज्ञी ने उस दवा के असर को कम होते हुए महसूस हुआ था यानी ये इंजेक्शन सिर्फ एक बार ही असर कर सकती थी पर ये दवाई बहुत ज्यादा खास थीं। इसीलिए अद्विका ने तुरंत आगे बढ़कर उस मेडिसिन का फार्मूला ढूंढ निकाला और बाद में उसने एक एक करके सभी बच्चों को चेंबर से बाहर लाया। फिर उसने एकबार उस चैंबर को ध्यान से देखा फिर उसने अपना हाथ आगे किया और उसके ऊपर अग्नि और बिजली के तत्व ऊर्जा को सक्रिय कर दिया। उसके बाद उसने उन दोनों को एकत्रित करके एक कहीं रिएक्शन को तैयार किया और उस गोले को उस चैंबर के अंदर फेक दिया।
अगले ही पल पूरा का पूरा चैंबर उस धमाके में तबाह हो गया। अद्धिका चाहें तो उसे ऐसे ही छोड़ सकती थी पर ऐसी दवाई के एक्सपेरिमेंट के सुराग अगर बाहर पता चल जाते तो कोई और भी इसके ट्रायल्स लेने के लिए उतावला हो जाता।
चैंबर में हुआ धमाका बहुत ही ज्यादा खतरनाक था जिस वजह से हॉस्पिटल की पूरी की पूरी इमारत हिल गई। बाहर निकलते वक्त अद्विका ने अपना चेहरा बदल लिया और वह सीढ़ियों से चढ़ते हुए हॉस्पिटल के लॉबी में पहुंच गई। यहां अभी भी वो सिक्योरिटी गार्ड्स पहरा दे रहे थे जिन्होंने उसे पकड़कर नीचे लाया था। अद्धिका ने बिना रेहम दिखाए उनके सिने में तलवार घुसेड़ दी और उसके बाद उसने बाकी गाईस को भी खत्म कर दिया।
वो धीरे धीरे एडमिनिस्ट्रेटिव सेक्शन को तरफ आने लगी और रास्ते में मिल रहे हर उस स्टाफ के उसने हाथ पैर काट दिए तो कुछ को उसने मौत के घाट भी उतार दिया। हॉस्पिटल में उसके आने से हर तरफ अफरातफरी मच गई। पर अद्धिका ने उसपर ध्यान नहीं दिया। इस वक्त उसे उन लोगों को मारना था जो लोग उसे ले जाते वक्त उसे घृणा से देख रहे थे।
उसके पीछे से रक्त सम्राज्ञी ने बच्चों को सुरक्षित बाहर लाया और चाइल्ड केयर यूनिट के बाहर रुके उनके मां बाप को सौंप दिया और उन्हें वहां उनके बच्चों के साथ क्या हो रहा था ये साफ साफ बता दिया। जिस वजह से बच्चों के माता पिता ने भी नीचे शोर मचाना शुरू कर दिया था।
इधर अद्विका ने उन सभी लोगों को एक एक करके बड़े ही दर्दनाक तरीके से मारना जारी रखा था। हॉस्पिटल के वो नर्सेस और डॉक्टर्स जिन्होंने उसके चरित्र पर कीचड़ उछाला था उन्हें अद्धिका ने मौत से बत्तर सजा दे डाली थी।
कुछ ही देर में हॉस्पिटल के अंदर म ही तबाही की खबरे बाहर फैल गई थी पर तब तक जिन मां बाप ने अपने बच्चों को खोया था उन्हें इसकी खबर पहले लग चुकी थी। एक्सपेरिमेंट की बात भी अब खुलकर सामने आ चुकी थी। इसी वजह से एक तरफ अद्विका लोगों को काट रही थी तो दूसरी तरफ बच्चों के माता पिता ने भी उस हॉस्पिटल के स्टाफ को पकड़ पकड़कर मारना शुरू किया था।
इधर नीतू जो अभी भी शहर में हो रही हत्याओं के बारे में सोच रही थी और परेश हो चुकी थी उसे जब ये खबर मिली तो उसका दिमाग पूरी तरह घूम गया। वो गुस्से से हॉस्पिटल की जगह पहुंच गई। तभी उसने देखा कि बच्चों के मां बाप ने पूरा हॉस्पिटल बर्बाद कर दिया है। उन्हें रोकने के लिए नीतू ने दो बार हवा में फायर कर दिया और गोली की आवाज से लोग तुरंत वहीं के वहीं रुक गए। तभी कुछ छोटे बच्चों को लेकर चेहरे पर थोड़े घाव के साथ अद्विका सामने से आते हुई दिखाई दी।
अद्विका को देखकर नीतू ने उसे पहचान लिया। अद्विका ने नीतू को एक्सपेरिमेंट और वो किसके द्वारा किया जा रहा था ये सब कुछ बता दिया साथ ही नीचे तबाह हुए चैंबर के बारे में भी बता दिया।
तभी नीतू ने पूछा, 'क्या आपको मालूम है ये किसने किया?"
ये सुनकर अद्धिका सिर्फ मुस्कुराई और बोली, "तुम पुलिसवालों को मै पे बिल्कुल भी नहीं बताऊंगी। तुम्हारे डिपार्टमेंट के लोगों ने इस बात को आज तकदबाकर रखा था ना तो इस बार हम भी तुम्हारे डिपार्टमेंट को कुछ भी नहीं बताएंगे क्योंकि न्याय करनेवाला न्याय करके निकल चुका है। में तो कहूंगी कि अभी भी समय है तुम अपने डिपार्टमेंट के लोगों को अलर्ट कर दो वरना हर गली चौराहे पर तुम्हे पुलिसवालों की लाशें बिछी मिलेगी।"
ये सुनकर नीतू ने अपना सिर झुका लिया तभी एक मरे हुए बच्चे की मां ने अपने पैरों से चप्पल निकाली और नीतू के मुंह पर फेक कर मरते हुए बोली, 'जब हमने अपने बच्चे की मौत के बारे में उन्हें बताया तो हमें तुम्हारे लोगों ने धक्के मारकर बाहर निकाला था और अब जब पापियों को सजा मिल गई है तो उस भगवान को तुम यहां पकड़ने के लिए आई हो। निकल जाओ यहां से वरना इस बार हम लोग इस हॉस्पिटल की तरह तुम्हारे धाने को भी जलाकर राख कर देंगे।
नीतू ने ये सुना तो उसकी आंखों में आंसू आ गए। उसने अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी के साथ निभाई थी पर उसकी ईमानदार उयूटी उसके डिपार्टमेंट ने लोगों के मसीहा को पकड़ने के लिए लगाई थी। इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी पर वो भी क्या कर सकती है।
वहीं लगभग दो घंटे पहले लुकास कॉरपोरेशन के बिल्डिंग में भी कुछ बड़ा हो चुका था। नंदन सालार अपने ऑफिस के अंदर एक वीडियो को बड़े ही गौर से देख रहा था। इस वीडियो में उसने देखा कि अद्धिका को बंदी बनाकर उन लोगों ने बांध दिया है।
तभी उसके बिल्डिंग के नीचे एक डिलीवरी बॉय उसका मंगाया हुआ खाना लेकर पहुंच जाता है। डिलीवरी बॉय ने जब ढेर सारे सिक्योरिटीवाले और पुलिसवाले लोगों को देखा तो उसने तुरंत नंदन को फोन लगाया। जिसपर नंदन ने उस लड़के को अंदर आने की अनुमति दे दी।
जब वह डिलीवरी बॉय ऑफिस के सबसे ऊपरी मंजिल पर पहुंचा तो उसने अपने सामने विराज को देखा जो उसे घूरकर देखने लगा।
क्या ये डिलीवरी बॉय उस नंदन के लिए खतरा पैदा करनेवाला है? क्या शौर्य ही वह डिलीवरी बॉय है? क्या अद्विका ने जो किया उस वजह कोई और भी उसपर नाराज हो जाएगा?



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