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REBORN OF VIDUR DEV

उसकी आँखों के सामने सब कुछ पल भर में बदल गया। तभी किलविष दल का लीडर आगे बढ़ा और बिना किसी चेतावनी के आचार्य विदुर पर घातक हमला कर दिया। अब वह कोई साधारण योद्धा नहीं रहा था, वह एक शक्ति देव बन चुका था… और उसके सिर्फ एक ही वार ने विदुर देव का अंत कर दिया।

वहीं दूसरी ओर विहान दल का लीडर भी उस भयानक हमले की लपटों में आकर बुरी तरह ज़ख्मी हो चुका था। पूरी युद्धभूमि पर चीखें, खून और विनाश छा चुका था।

किलविष दल का लीडर अब आगे बढ़ा। उसकी आँखों में सिर्फ मौत थी। वह अपना अगला हमला करने ही वाला था—एक ऐसा हमला जो वहाँ मौजूद हर जीवन को खत्म कर देता…

तभी—

अचानक आकाश गरजा और वहाँ ध्रुव शौर्य आ पहुंचा।

ध्रुव शौर्य और किलविष दल के लीडर के बीच ऐसा मुकाबला शुरू हुआ, जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया। हर वार में विनाश था, हर टकराव में प्रलय की आहट थी। दोनों में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं था।

लेकिन अंत में…

ध्रुव शौर्य ने अपनी जान की परवाह किए बिना अंतिम प्रहार किया—और उसी के साथ उसने अपनी जान दे दी… मगर पूरी दुनिया को बचा लिया।

नाग्रानी हिनिसा की आँखों से आँसू बहने लगे। उसने बिना एक पल गंवाए अपना सबसे बड़ा बलिदान दिया। अपनी 9 रंगी दिव्य नागिन का शरीर और अपनी आत्मा देकर उसने ध्रुव शौर्य की आत्मा को वापस जीवित कर दिया।

लेकिन इस युद्ध ने उससे सब कुछ छीन लिया था।

ध्रुव शौर्य ने अपने दो सबसे अपने खो दिए थे—एक उसके आचार्य… और दूसरी वही लड़की, जिससे वह कभी डरता था… उसी लड़की ने अपनी जान दे दी थी, सिर्फ ध्रुव की जान बचाने के लिए।

कुछ ही दिनों में किलविष दल को दुनिया से हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया। और मार्कस… वह भी हमेशा के लिए शांति में चला गया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…

किसी और ब्रह्मांड के एक कोने में दो अजीब सी चमक दिखाई दी। अगर कोई उन चमकों को ध्यान से देखता, तो वह समझ जाता कि वे कोई साधारण रोशनी नहीं थीं—वे आत्मा के टुकड़े थे…

और वे किसी और के नहीं, बल्कि आचार्य विदुर और नाग्रानी हिनिसा के थे।

तभी उनके सामने एक ऐसी रोशनी प्रकट हुई, जिसे देखा नहीं जा सकता था… सिर्फ महसूस किया जा सकता था। वह असल में जीवन और मृत्यु की देवी थी।

उसने उन दोनों आत्माओं को देखा और अपने मन में कहा—“ये दोनों मर चुके हैं… फिर भी इस दुनिया को छोड़ने के लिए तैयार नहीं…”

कुछ पल सोचने के बाद उसके चेहरे पर एक मधुर मुस्कान आई।“क्यों ना इन्हें एक और मौका दिया जाए…”

उसने उन्हें पुनर्जन्म का वरदान दिया और कहा—“तुम पुनर्जन्म लोगे… लेकिन तुम्हारी सारी याददाश्त मिटा दी जाएगी… और तुम नहीं जानोगे कि तुममें से एक मार्कस के सुपर योद्धा के गुरु और उसकी पत्नी थे… क्या तुम इसके लिए तैयार हो?”

कुछ क्षणों की खामोशी के बाद एक धीमी, दर्द भरी लेकिन उम्मीद से भरी आवाज गूंजी—“मंजूर है…”

वह आवाज नाग्रानी हिनिसा की थी।

अगले ही पल एक ऐसी तेज़ चमक फैली कि पूरा ब्रह्मांड हिल गया… और दोनों आत्माएं गायब हो गईं।

1000 साल बाद…

एक छोटे से घर में अचानक हलचल मच गई।

“बच्चा जिंदा है! बच्चा मरा नहीं है!”

एक आदमी खुशी से चिल्ला रहा था। तभी एक औरत दौड़ती हुई आई और बच्चे को अपनी गोद में उठा लिया।

“मेरा बच्चा… मेरा बच्चा…”

उसने मुस्कुराते हुए कहा—“तुम्हारा नाम होगा विदुर… और तुम मेरे देव परिवार के चिराग होगे…”

और उसी दिन उस बच्चे का नाम रखा गया—विदुर देव।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…

10 साल बाद अचानक विदुर देव कहीं गायब हो गया।

वह कहाँ गया?क्या यह वही विदुर है—जो एक सुपर योद्धा का गुरु था?या यह कोई और है?और हिनिसा कहाँ है… क्या उसने भी पुनर्जन्म ले लिया है?क्या कभी विदुर वापस मार्कस जा पाएगा?क्या हिनिसा और विदुर देव फिर मिल पाएंगे?क्या विदुर देव को कभी याद आएगा कि आखिर वह कौन है…?

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